फ़िज़ो फ्रिंज (Fizeau Fringe) क्या है?
फिजू फ्रिंजेस (Fizeau Fringe) प्रकाश के व्यतिकरण (interference) से बनने वाली उजली और अंधेरी धारियों (bright and dark bands) का पैटर्न होता है।
यह तब बनता है जब एकवर्णी प्रकाश की किरण (monochromatic light - एक ही तरंगदैर्ध्य का प्रकाश) दो लगभग समानांतर परावर्तक सतहों के बीच से गुजरती है और उनसे परावर्तित होकर आपस में व्यतिकरण करती है।
सरल शब्दों में
जब दो चिकनी सतहों (जैसे कांच की प्लेट और सैंपल सतह) के बीच बहुत पतली हवा या फिल्म की परत होती है, तो उस पर पड़ने वाली प्रकाश किरणें कई बार परावर्तित होकर आपस में मिलती हैं।
इससे उजली और अंधेरी धारियों का पैटर्न बनता है जिसे फ़िज़ो फ्रिंज कहते हैं।
"दो लगभग समानांतर परावर्तक सतहों के बीच प्रकाश के हस्तक्षेप से बनने वाली उजली-अंधेरी धारियों के पैटर्न को फ़िज़ो फ्रिंज कहते हैं।"
फ़िज़ो फ्रिंज का उपयोग मुख्य रूप से इन चीज़ों को मापने के लिए किया जाता है:
Surface flatness (सतह की समतलता)
Thin film thickness (पतली फिल्म की मोटाई)
Step height (सतह के छोटे ऊँच-नीच का मापन)
Surface topography का अध्ययन
महत्वपूर्ण बिंदु
यह Multiple beam interferometer में देखा जाता है।
इसमें समानांतर फ्रिंज बनती हैं।
हर एक फ्रिंज एकसमान मोटाई वाली पट्टी को दर्शाती है।
फ़िज़ो फ्रिंज द्वारा सतह की ऊंचाई और फिल्म की मोटाई निर्धारण की शर्तें
फ़िज़ो फ्रिंजेस का उपयोग पतली फिल्म की मोटाई और सतह की ऊंचाई (step height) को मापने के लिए किया जाता है। मापन की उच्च सटीकता प्राप्त करने के लिए निम्न शर्तें हैं—
1. सतहों की उच्च समतलता (High Surface Flatness)
जिन परावर्तक प्लेटों के बीच व्यतिकरण कराया जाता है वे अत्यधिक समतल और अच्छी तरह पॉलिश करी होनी चाहिए।
यदि सतह में असमानता होगी तो फ्रिंज पैटर्न विकृत हो जाएगा और मापन में त्रुटि आएगी।
2. छोटा वेज कोण (Small Wedge Angle)
दोनों प्लेटों के बीच बनाया गया वेज कोण बहुत छोटा होना चाहिए ताकि फ्रिंज स्पष्ट और संकीर्ण बने रहें।
3. उच्च परावर्तन वाली परत (High Reflecting Surface)
प्लेटों पर उच्च परावर्तक चाँदी (silver) की परत चढ़ाई जाती है।
इससे कई बार परावर्तन होता है और फ्रिंज बहुत तीक्ष्ण (sharp) बनती हैं, जिससे मापन अधिक सटीक होता है।
4. एकवर्णी प्रकाश का उपयोग (Monochromatic Light)
प्रयोग में एकवर्णी प्रकाश (जैसे मरकरी लैम्प) का उपयोग करना चाहिए ताकि स्पष्ट और स्थिर फ्रिंज प्राप्त हों।
5. उचित फ्रिंज संख्या (Optimum Fringe Spacing)
प्रति सेमी फ्रिंजों की संख्या न बहुत अधिक और न बहुत कम होनी चाहिए।
यदि फ्रिंज बहुत दूर हों तो विस्थापन मापना कठिन होगा और यदि बहुत पास हों तो फ्रिंज चौड़ी हो सकती हैं।
6. कम फिल्म मोटाई (Small Film Thickness)
फिल्म की मोटाई बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए क्योंकि अधिक मोटाई पर multiple reflection की phase condition प्रभावित हो सकती है और फ्रिंज चौड़ी हो सकती हैं।
7. सही कोलिमेशन (Proper Collimation of Light)
प्रकाश किरणें समानांतर (collimated) होनी चाहिए ताकि सभी किरणें समान कोण पर इंटरफेरेंस करें।
8. कंपन और तापमान का नियंत्रण (Stable Environment)
प्रयोग के दौरान कंपन और तापमान परिवर्तन को कम रखना चाहिए, क्योंकि इससे फ्रिंज की स्थिति बदल सकती है।

