जीवविज्ञान (Biology) में वर्गीकरण की एक सुव्यवस्थित प्रणाली होती है, जिसे पदानुक्रम (Hierarchy) कहा जाता है। इस प्रणाली में फाइलम (Phylum) या संघ, जगत (Kingdom) के बाद दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्तर है।
संघ (Phylum) क्या है?
संघ (Phylum) जैव जगत वर्गीकरण का एक स्तर है जो 'जगत' (Kingdom) के नीचे और 'वर्ग' (Class) के ऊपर आता है। जंतु जगत (Animal Kingdom) के लिए 'संघ' शब्द का प्रयोग किया जाता है, जबकि पादप जगत (Plant Kingdom) के लिए इसके समकक्ष 'भाग' (Division) शब्द का उपयोग होता है।
एक संघ के भीतर उन जीवों को रखा जाता है जिनके शरीर की मूल योजना या जुड़ने का प्रकार (Basic Body Plan) एक समान होती है। उदाहरण : वे सभी जीव जिनमें रीढ़ की हड्डी या नसों का एक मुख्य गुच्छा (Dorsal nerve cord) पाया जाता है, उन्हें कॉर्डेटा (Chordata) संघ में रखा जाता है।
वैज्ञानिक वर्गीकरण का क्रम इस प्रकार है:
- जगत (Kingdom)
- संघ (Phylum)
- वर्ग (Class)
- गण (Order)
- कुल (Family)
- वंश (Genus)
- जाति (Species)
जंतु जगत के सभी 35 संघों को 11 मुख्य (Major) और 24 गौण (Minor) संघों में बांटा गया है जिनका विस्तृत वर्णन निम्नानुसार है। यह वर्गीकरण उनकी जटिलता और विकास के क्रम को प्रदर्शित करता है और यह बताता है कि जीवन किन किन परिस्थितियों में पनप सकता है।
1. मुख्य संघ (Major Phyla) - 11 संघ
यह संघ पारिस्थितिकी तंत्र का आधार हैं और इसमें प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक होती है।
2. निडेरिया (Cnidaria): इस संघ के जीवों में डंक मारने वाली कोशिकाएं (Sting cells) होती हैं। जैसे- जेलीफ़िश और मूँगा।
3. टीनोफोरा (Ctenophora): इस संघ के जीव अखरोट जैसे दिखाई देते हैं इसलिए इन्हें 'समुद्री अखरोट' कहते हैं। ये कंघी जैसी पट्टियों से तैरते हैं और इनमें जैव-दीप्ति (Bioluminescence) होती है।
4. प्लेटिहेल्मिन्थीज (Platyhelminthes): इस संघ के जीव फीते जैसे दिखाई देते हैं। ये द्विपार्श्व सममित वाले और अक्सर परजीवी होते हैं। जैसे- फीताकृमि, चपटाकृमि।
5. एस्केलमिन्थीज (Aschelminthes/Nematoda): इस संघ के जीवों का शरीर गोलाकार या बेलनाकार होता है इस लिए इन्हें 'गोल कृमि' कहते हैं। जैसे- एस्केरिस।
6. एनेलिडा (Annelida): इस संघ के जीवों का शरीर छल्लों या खंडों (Segments) में बँटा होता है। जैसे- केंचुआ।
7. आर्थ्रोपोडा (Arthropoda): यह जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ। इस संघ में सबसे अधिक जीव पाए जाते हैं। इनके पैर संधियुक्त (Jointed) होते हैं। जैसे- तितली, बिच्छू।
8. मोलस्का (Mollusca): इस संघ के जीवों का शरीर कोमल होता है इसलिए ये अक्सर कैल्शियम के कठोर कवच में रहते हैं। जैसे- घोंघा, ऑक्टोपस।
9. एकिनोडर्मेटा (Echinodermata): इस संघ के जीवों की त्वचा काँटेदार होती है और इनमें जल संवहन तंत्र पाया जाता है। जैसे- तारा मछली।
10. हेमीकॉर्डेटा (Hemichordata): इस संघ में समुद्री कृमि जैसे जीव हैं जो कॉर्डेटा के पूर्वज माने जाते हैं।
11. कॉर्डेटा (Chordata): यह सबसे विकसित संघ है। इस संघ के जीवों में रीढ़ की हड्डी पायी जाती है। जैसे- मनुष्य, पक्षी, मछली।
2. गौण संघ (Minor Phyla) - 24 संघ
इन संघों में जीवों की संख्या थोड़ी कम होती है और ये जीव अधिकतर बहुत विशिष्ट शारीरिक बनावट वाले होते हैं।
12. मेसोज़ोआ (Mesozoa): इस संघ के जीव बहुत ही सरल परजीवी जीव होते हैं।
13. प्लैकोजोआ (Placozoa): इस संघ के जीव चपटे, सरलतम बहुकोशिकीय होते हैं।
14. रोटिफेरा (Rotifera): इस संघ के जीव पहिये जैसे अंगों वाले सूक्ष्म जीव होते हैं।
15. गैस्ट्रोट्राइका (Gastrotricha): इस संघ में बालों वाले सूक्ष्म जलीय जीव होते हैं।
16. डाइसायमिडा (Dicyemida): इस संघ के जीव ऑक्टोपस के गुर्दों में पाए जाने वाले परजीवी होते हैं।
17. ओर्थोनेक्टिडा (Orthonectida): इस संघ के जीव समुद्री सूक्ष्म परजीवी होते हैं।
18. निमेर्टिया (Nemertea): इस संघ के जीव लंबी सूंड जैसी अंगों वाले रिबन कृमि होते हैं।
19. एकांथोसेफला (Acanthocephala): इस संघ के जीव काँटेदार सिर वाले परजीवी कृमि होते हैं।
20. निमेटोमोर्फा (Nematomorpha): इस संघ के जीव घोड़े के बाल जैसे दिखने वाले कृमि होते हैं।
21. प्रियापुलिडा (Priapulida): इस संघ के जीव समुद्री कैक्टस जैसे दिखने वाले शिकारी कृमि होते हैं।
22. सिपुलकुला (Sipuncula): इस संघ के जीव मूंगफली के कीड़े होते हैं।
23. ग्नथोस्टोमुलीडा (Gnathostomulida): इस संघ के जीव जबड़े वाले सूक्ष्म समुद्री कृमि होते हैं।
24. चेटोग्नाथा (Chaetognatha): इस संघ के जीव समुद्री शिकारी 'एरो वर्म्स' हैं।
25. ब्रायोजोआ (Bryozoa): इस संघ के जीव काई की तरह दिखने वाले समुद्री जंतु होते हैं।
26. ब्रैकियोपोडा (Brachiopoda): यह प्राचीन समुद्री जीव है जो सीपी जैसे दिखते हैं।
27. फोरोनिडा (Phoronida): ये सुरक्षात्मक नली में रहने वाले जीव होते हैं।
28. एंटोप्रोक्टा (Entoprocta): ये डंठल वाले सूक्ष्म जलीय जीव होते हैं।
29. टार्डिग्रैडा (Tardigrada): इसे अमर 'वॉटर बियर' कहते हैं। ये अंतरिक्ष के निर्वात की कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं।
30. ओनिकोफोरा (Onychophora): ये वेलवेट वर्म्स हैं, जिनके पैर बहुत कोमल होते हैं।
31. किनोरिंखा (Kinorhyncha): ये कीचड़ में रहने वाले कँटीले सूक्ष्म जीव होते हैं।
32. लोरिसिफेरा (Loricifera): ये छोटे कवच (Lorica) के अंदर रहने वाले जीव होते हैं।
33. साइक्लियोफोरा (Cycliophora): ये झींगे के मुँह पर रहने वाले विशिष्ट जीव होते हैं।
34. माइक्रोग्नाथोजोआ (Micrognathozoa): ये जटिल जबड़ों वाले अत्यंत सूक्ष्म जीव होते हैं।
35. जेनेकोेलोमोर्फा (Xenacoelomorpha): ये बहुत सरल संरचना वाले चपटे जीव होते हैं।
संघ का महत्व
समानता की पहचान: संघ हमें यह समझने में मदद करता है कि अलग-अलग दिखने वाले विभिन्न जीवों के शरीर की आंतरिक संरचना में क्या समानताएं होती हैं।
विकासवादी संबंध (Evolutionary Links): संघ के माध्यम से वैज्ञानिक यह पता लगा पाते हैं कि विभिन्न प्रजातियों का विकास एक-दूसरे से कैसे हुआ होगा।
अध्ययन में सुगमता: लाखों प्रजातियों को अलग-अलग समूहों में बांटने से उनके विशिष्ट गुणों और लक्षणों का अध्ययन करना आसान हो जाता है।
निष्कर्ष
'संघ' जीवविज्ञान का वह आधार है जो जीवों कि विविधता के बीच एकता को दर्शाता है। जैसे कि एक तितली और एक केकड़ा (दोनों आर्थ्रोपोडा) दिखने में अलग अलग होने के बावजूद अपनी शारीरिक बनावट के कुछ बुनियादी नियमों में एक समान होते हैं। 11 मुख्य संघ हमें प्रकृति की व्यापकता दिखाते हैं, जबकि गौण संघ यह बताते हैं कि जीवन की सीमाएँ कितनी सूक्ष्म और अद्भुत हो सकती हैं। जीवों का परिचय हमें यह बताता है कि जीवन और कितना अधिक सूक्ष्म स्तर तक पनप सकता है। पृथ्वी पर अब भी बहुत से ऐसे जीव हैं जो मानवविहीन क्षेत्रों में रहते हैं और मानव की नजरों में नहीं आए हैं। समुद्र की गहराइयों में भी ऐसी हजारों प्रजातियां हैं जो मानव की नजरों में नहीं आयी हैं।
