पतली फिल्म की विद्युत चालकता (Electrical Conductivity of Thin films)

पतली फिल्मों (Thin Films) के विद्युतीय गुण

पतली फिल्में (Thin Films) ऐसी परतें होती हैं जिनकी मोटाई कुछ नैनोमीटर से लेकर कुछ माइक्रोमीटर तक होती है। आधुनिक युग के इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, सौर सेल, MEMS, सेंसर तथा Thin Film Transistor (TFT) में इनका बहुत अधिक उपयोग होता है। पतली फिल्मों के विद्युत गुण स्थूल (bulk) पदार्थों से भिन्न होते हैं क्योंकि इनमें सतही प्रभाव, क्वांटम आकार प्रभाव तथा संरचनात्मक दोष अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। 

ठोस अवस्था भौतिकी के बैंड सिद्धांत के अनुसार किसी पदार्थ के ऊर्जा बैंड यह निर्धारित करते हैं कि वह चालक, अर्धचालक अथवा रोधक है। पतली फिल्मों में दो सतहों की उपस्थिति के कारण ऊर्जा संरचना में परिवर्तन होता है, जिससे विद्युत गुण प्रभावित होते हैं।

पतली फिल्मों में मुख्य प्रभाव निम्न हैं:

  1. आकार प्रभाव (Size Effect)

  2. सतही अवस्थाएँ (Surface States)

  3. सतही प्रकीर्णन (Surface Scattering)

  4. इलेक्ट्रोड प्रभाव

  5. संरचनात्मक दोष

  6. उच्च विद्युत क्षेत्र प्रभाव

इन्हीं कारणों से पतली फिल्मों की चालकता स्थूल (bulk) पदार्थों से अलग होती है।

Electrical Conductivity of thin films

पतली फिल्मों की संरचना

वास्तविक पतली फिल्मों की संरचना आदर्श क्रिस्टल से भिन्न होती है। निर्माण विधि, जमाव दर, तापमान, वैक्यूम तथा अशुद्धियाँ फिल्म की संरचना को प्रभावित करती हैं। फिल्मों में दानेदार संरचना, डिस्लोकेशन, रिक्त स्थान तथा अशुद्धियाँ पाई जाती हैं, जो इलेक्ट्रॉनों के प्रकीर्णन को बढ़ाती हैं और प्रतिरोध में वृद्धि करती हैं।

पतली फिल्मों का प्रतिरोध

यदि किसी फिल्म की लंबाई l, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल S तथा विशिष्ट प्रतिरोध ρ हो, तो उसका प्रतिरोध:

R = ρl/S

जहाँ
R = प्रतिरोध
ρ = विशिष्ट प्रतिरोध
l = लंबाई
S = अनुप्रस्थ क्षेत्रफल

प्रयोगों से ज्ञात हुआ है कि पतली फिल्मों का प्रतिरोध सामान्यतः स्थूल (bulk) पदार्थों से अधिक होता है।

चालकता का सिद्धांत

धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण चालकता उत्पन्न होती है। चालकता का समीकरण:

σ = Ne²λ / mu

जहाँ
N = मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व
e = इलेक्ट्रॉन का आवेश
λ = औसत मुक्त पथ
m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
u = औसत तापीय वेग

औसत मुक्त पथ जितना अधिक होगा, चालकता उतनी अधिक होगी।

मैथीसेन नियम (Matthiessen Rule)

धातुओं का कुल प्रतिरोध विभिन्न प्रकीर्णन प्रक्रियाओं के योग के बराबर होता है:

ρB = ρph + ρi

जहाँ

ρB = 
ρph = फोनॉन प्रकीर्णन के कारण प्रतिरोध
ρi = अशुद्धियों तथा संरचनात्मक दोषों के कारण प्रतिरोध

कम तापमान पर फोनॉन प्रभाव कम हो जाता है तथा केवल अवशिष्ट प्रतिरोध रह जाता है।

सतही प्रकीर्णन (Surface Scattering)

जब फिल्म की मोटाई इलेक्ट्रॉनों के औसत मुक्त पथ के बराबर या उससे कम हो जाती है, तब इलेक्ट्रॉन सतहों से टकराने लगते हैं। इससे:

  • औसत मुक्त पथ घटता है

  • चालकता घटती है

  • प्रतिरोध बढ़ता है

अब कुल प्रतिरोध:

ρ = ρph + ρi + ρs

जहाँ ρs सतही प्रकीर्णन के कारण प्रतिरोध है।

प्रकीर्णन के प्रकार

  1. Diffuse Scattering — इलेक्ट्रॉन अनियमित दिशा में बिखरते हैं।

  2. Specular Scattering — इलेक्ट्रॉन दर्पण की तरह परावर्तित होते हैं।

थॉमसन सिद्धांत

Thomson ने पूर्ण diffuse scattering के लिए सिद्धांत प्रस्तुत किया। इस सिद्धांत के अनुसार यदि फिल्म की मोटाई इलेक्ट्रॉनों के मुक्त पथ के बराबर हो, तो चालकता स्थूल (bulk) चालकता की लगभग 75% रह जाती है।

फुच्स–सोंडहाइमर सिद्धांत

फच्स (Fuchs) और सोंडहाइमर (Sondheimer) ने बोल्ट्जमैन वितरण समीकरण (Boltzmann Transport Equation) के आधार पर अधिक सटीक सिद्धांत दिया।

बोल्ट्जमैन समीकरण:

∂f/∂t + v·∇rf + F·∇vf = (∂f/∂t)collision

मोटी फिल्मों के लिए चालकता:

σ = σ0 (1 + 3λ0/8t)

बहुत पतली फिल्मों के लिए:

σ = σ0 (3t/4λ0) ln(λ0/t)

जहाँ
t = फिल्म की मोटाई
λ0 = स्थूल (bulk) मुक्त पथ
σ0 = स्थूल (bulk) चालकता

तापमान गुणांक

प्रतिरोध का तापमान गुणांक:

α = (1/ρ)(dρ/dT)

पतली फिल्मों में यह स्थूल (bulk) पदार्थों से भिन्न होता है क्योंकि सतही प्रभाव अधिक होते हैं।

उच्च विद्युत क्षेत्र प्रभाव

पतली फिल्मों की मोटाई अत्यंत कम होने के कारण कम वोल्टेज पर भी उच्च विद्युत क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इससे टनलिंग, फील्ड उत्सर्जन तथा स्पेस चार्ज प्रभाव उत्पन्न होते हैं।

इलेक्ट्रोड प्रभाव

पतली रोधक फिल्मों में इलेक्ट्रोड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इलेक्ट्रोड सामग्री के अनुसार संपर्क प्रतिरोध तथा आवेश परिवहन प्रभावित होता है। MIS तथा MOS संरचनाओं में यह प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

पतली फिल्मों के उपयोग

पतली फिल्मों का उपयोग निम्न उपकरणों में किया जाता है:

  • रेजिस्टर

  • कैपेसिटर

  • Thin Film Transistor (TFT)

  • MEMS

  • Solar Cell

  • LED

  • सेंसर

  • Integrated Circuits

निष्कर्ष

पतली फिल्मों के विद्युत गुण मुख्यतः निम्न कारकों पर निर्भर करते हैं:

  • फिल्म की मोटाई

  • सतही प्रकीर्णन

  • संरचनात्मक दोष

  • निर्माण तकनीक

  • तापमान

  • सतही अवस्थाएँ

पतली फिल्मों में सतही प्रभाव अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं, जिसके कारण उनका प्रतिरोध स्थूल (bulk) पदार्थों से अधिक होता है। उचित निर्माण तकनीकों द्वारा चालकता तथा तापीय गुणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

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